बरसात के मौसम में पशुओं की देखभाल कैसे करें? जानें जरूरी टिप्स

13 Aug 2026 · Tractor Kharido Team

बरसात के मौसम में पशुओं की देखभाल कैसे करें?

बरसात के मौसम में पशुओं की देखभाल कैसे करें? जानें जरूरी टिप्स

मानसून का मौसम खेती-किसानी के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम पशुपालकों के लिए कई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। लगातार बारिश, कीचड़ भरे बाड़े और सीलन भरी हवा—ये सब मिलकर पशुओं की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। अगर आप डेयरी फार्मिंग या पशुपालन से जुड़े हैं, तो बरसात के इन दो-तीन महीनों में थोड़ी सी अतिरिक्त सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।

इस लेख में हम बताएंगे कि बारिश के मौसम में पशुओं को किन बीमारियों का खतरा रहता है और उनसे बचाव के लिए किसान भाई किन आसान उपायों को अपना सकते हैं।

मानसून में पशु क्यों जल्दी बीमार पड़ते हैं?

बारिश के दिनों में तापमान और नमी में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। बाड़े की फर्श गीली रहती है, चारा जल्दी सीलन पकड़ लेता है और पीने के पानी में गंदगी मिलने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे माहौल में बैक्टीरिया, फंगस और परजीवी तेजी से पनपते हैं, जिससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है और वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।

बारिश में पशुओं को होने वाली आम बीमारियां

  • गलघोंटू (हैमरेजिक सेप्टिसीमिया) – तेज बुखार, गले में सूजन और सांस लेने में तकलीफ इसके सामान्य लक्षण हैं। यह जानलेवा भी साबित हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में न लें।
  • लंगड़ा बुखार (ब्लैक क्वार्टर) – नम मिट्टी के लगातार संपर्क में रहने वाले पशुओं में यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है। पैरों में सूजन और लंगड़ापन इसके शुरुआती संकेत हैं।
  • खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) – मुंह और खुरों पर छाले बनना इसकी पहचान है, जिससे पशु ठीक से खा-पी नहीं पाता।
  • दस्त और पेट संबंधी समस्याएं – सीला या दूषित चारा-पानी खाने-पीने से पशुओं को दस्त की शिकायत हो सकती है, जिससे कमजोरी बढ़ जाती है।

पशुओं को बीमारियों से बचाने के आसान उपाय

1. बाड़े को सूखा और हवादार रखें

पशुशाला में पानी बिल्कुल जमा न होने दें। फर्श गीली लगे तो वहां भूसा या सूखी मिट्टी डालकर नमी कम करें। साथ ही बाड़े में हवा का सही आवागमन बना रहना चाहिए, ताकि उमस न टिके।

2. रोजाना सफाई की आदत डालें

गोबर और गंदा पानी बाड़े के आसपास इकट्ठा न होने दें। चारा-पानी के बर्तनों को हर दिन साफ करें, क्योंकि गंदे बर्तन संक्रमण फैलाने का बड़ा जरिया बन सकते हैं।

3. ताजा और सूखा चारा ही खिलाएं

बारिश में चारा जल्दी सड़ने लगता है। ऐसे में बासी, गीला या बदबूदार चारा देने से बचें—यह सीधे पेट पर असर डालता है। हो सके तो चारे को ऐसी जगह स्टोर करें जहां बारिश का पानी न पहुंचे।

4. समय पर टीकाकरण कराएं

मानसून शुरू होने से पहले ही नजदीकी पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग से संपर्क कर गलघोंटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों का टीका जरूर लगवाएं। यह सबसे कारगर और किफायती बचाव है।

5. पशुओं पर नजर बनाए रखें

अगर कोई पशु अचानक कम खाना खाए, सुस्त दिखे, बुखार हो या शरीर पर सूजन नजर आए, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। बीमार पशु को बाकी झुंड से अलग रखना भी जरूरी है, ताकि संक्रमण न फैले।

निष्कर्ष

बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए जितना उपयोगी है, उतना ही सावधानी भरा भी। साफ-सफाई, सही चारा और समय पर टीकाकरण—इन तीन बातों का ध्यान रखकर आप अपने पशुओं को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं और नुकसान से भी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. बारिश के मौसम में पशुओं को सबसे ज्यादा खतरा किन बीमारियों से रहता है?

गलघोंटू, लंगड़ा बुखार, खुरपका-मुंहपका रोग और दस्त जैसी बीमारियां बरसात में सबसे ज्यादा देखी जाती हैं।

2. पशुशाला में नमी कम करने का सबसे आसान तरीका क्या है?

फर्श पर सूखी मिट्टी या भूसा बिछाना और शेड में हवा का सही आवागमन बनाए रखना नमी कम करने का सबसे कारगर तरीका है।

3. क्या बारिश से पहले टीकाकरण जरूरी है?

हां, मानसून शुरू होने से पहले टीकाकरण कराने से गलघोंटू और लंगड़ा बुखार जैसी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

4. अगर पशु को दस्त हो जाए तो क्या करना चाहिए?

पशु को साफ पानी और ताजा चारा दें, और अगर स्थिति में सुधार न हो तो बिना देर किए पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

5. बीमार पशु को झुंड से अलग क्यों रखना चाहिए?

संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं, इसलिए बीमार पशु को अलग रखने से बाकी पशुओं को संक्रमण से बचाया जा सकता है।

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