लाडो प्रोत्साहन योजना: बेटी के जन्म से लेकर उसके 21वें साल तक, राजस्थान सरकार का साथ

17 Aug 2026 · Tractor Kharido Team · 1 min read

लाडो प्रोत्साहन योजना

लाडो प्रोत्साहन योजना: बेटी के जन्म से लेकर उसके 21वें साल तक, राजस्थान सरकार का साथ

राजस्थान के किसी भी गांव या कस्बे में जाकर पूछ लीजिए — बेटी के जन्म की खबर आज भी मिश्रित भावनाओं के साथ आती है। खुशी तो होती है, लेकिन साथ ही मन में एक सवाल भी उठता है — "पढ़ाई-लिखाई, शादी, आगे का खर्चा कैसे होगा?" यही सवाल है जिसे कम करने के लिए राज्य सरकार ने लाडो प्रोत्साहन योजना शुरू की है। यह कोई नई-नवेली स्कीम नहीं, बल्कि पुरानी मुख्यमंत्री राजश्री योजना का ही उन्नत और दोगुना असरदार रूप है, जिसे अगस्त 2024 से लागू किया गया।

अभी तक इस योजना के तहत राज्य की करीब 8.84 लाख बेटियां लाभान्वित हो चुकी हैं — यह आंकड़ा खुद बताता है कि यह योजना कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखा रही है।

आखिर है क्या यह योजना?

सीधी भाषा में कहें तो लाडो प्रोत्साहन योजना एक ऐसी सरकारी पहल है जो बेटी के जन्म से लेकर उसके 21 साल की उम्र तक, यानी पूरी शिक्षा यात्रा के दौरान, कुल ₹1,50,000 रुपये की आर्थिक मदद परिवार को देती है। खास बात यह है कि यह रकम एक साथ नहीं, बल्कि बेटी के जीवन के अलग-अलग जरूरी मोड़ों पर — जन्म, टीकाकरण, स्कूल में दाखिला और आगे की पढ़ाई — सात हिस्सों में दी जाती है, ताकि हर पड़ाव पर परिवार को थोड़ी राहत मिलती रहे।

पहले यह योजना "मुख्यमंत्री राजश्री योजना" के नाम से चलती थी और राशि ₹50,000 हुआ करती थी। सरकार ने न सिर्फ नाम बदला, बल्कि मदद की रकम को तीन गुना तक बढ़ा दिया — और जिन परिवारों को पहले राजश्री योजना के तहत किस्तें मिलनी बाकी थीं, उन्हें अब आगे की किस्तें नई, बढ़ी हुई दरों पर ही लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत मिलेंगी।

सात किस्तों का पूरा गणित

यही वह हिस्सा है जो हर पेरेंट को समझना चाहिए, क्योंकि किस्त कब और कितनी मिलेगी — यही सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है।

किस्त कब मिलेगी राशि
पहली बेटी के जन्म पर ₹2,500
दूसरी एक साल की उम्र और पूरा टीकाकरण होने पर ₹2,500
तीसरी पहली कक्षा में दाखिले पर ₹4,000
चौथी छठी कक्षा में दाखिले पर ₹5,000
पांचवीं दसवीं कक्षा में दाखिले पर ₹10,000
छठी बारहवीं कक्षा में दाखिले पर ₹25,000
सातवीं (अंतिम) स्नातक पूरा होने या 21 साल की उम्र पर ₹1,00,000

एक दिलचस्प बात यह है कि पहली छह किस्तें माता-पिता या अभिभावक के खाते में जाती हैं, लेकिन आखिरी और सबसे बड़ी किस्त सीधे बेटी के अपने बैंक खाते में ट्रांसफर होती है — यानी जिस उम्र में वह अपने फैसले खुद लेने लायक होती है, उसी उम्र में उसे आर्थिक तौर पर भी थोड़ा आत्मनिर्भर बनाया जाता है।

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?

हर सरकारी योजना की तरह इसमें भी कुछ शर्तें तय की गई हैं:

  • बेटी का जन्म राजस्थान के किसी सरकारी अस्पताल या सरकार से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो
  • परिवार राजस्थान का मूल निवासी हो
  • निजी अस्पताल में जन्म हुआ है तो परिवार जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत पहले से पंजीकृत होना चाहिए
  • बेटी को समय पर सभी जरूरी टीके लगे हों
  • स्कूली शिक्षा के दौरान बेटी सरकारी स्कूल या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में नियमित रूप से पढ़ रही हो

घर पर हुए जन्म को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है — इसके पीछे मकसद साफ है: संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, ताकि मां और बच्ची दोनों की सेहत सुरक्षित रहे।

आवेदन के लिए क्या चाहिए और प्रक्रिया कितनी आसान है?

अच्छी खबर यह है कि इसमें किसी ई-मित्र या सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं। पहली दो किस्तें तो पूरी तरह स्वचालित तरीके से मिलती हैं — अस्पताल का स्टाफ ही जन्म और टीकाकरण की जानकारी PCTS/OJAS पोर्टल पर दर्ज कर देता है, और DBT के जरिए राशि सीधे खाते में पहुंच जाती है। आगे की किस्तों के लिए स्कूल में दाखिले के वक्त शाला दर्पण पोर्टल पर जनाधार और PCTS डिटेल का मिलान कर दिया जाता है।

फिर भी, दस्तावेज तैयार रखना समझदारी है:

  • जनआधार कार्ड
  • माता-पिता का आधार कार्ड
  • बेटी का जन्म प्रमाण पत्र
  • टीकाकरण कार्ड
  • बैंक खाते की जानकारी
  • मूल निवास प्रमाण पत्र

जरूरत पड़ने पर आंगनबाड़ी सहायिका या स्कूल में नामित लाडो प्रोत्साहन योजना प्रभारी से भी मदद ली जा सकती है।

यह योजना असल में बदल क्या रही है?

आंकड़ों से आगे बढ़कर देखें तो इस योजना का मकसद तीन मोर्चों पर एक साथ काम करना है — बेटी के जन्म को बढ़ावा देना, उसकी शिक्षा में बीच में पढ़ाई छूटने से रोकना, और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना। जिस तरह से राशि को कक्षा 1, 6, 10 और 12 के दाखिले से जोड़ा गया है, वह अपने आप में एक सोची-समझी रणनीति है — क्योंकि यही वे मोड़ हैं जहां आर्थिक तंगी के चलते बेटियों की पढ़ाई अक्सर रुक जाती है। इस तरह लाडो प्रोत्साहन योजना सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि बेटियों को स्कूल में बनाए रखने का एक व्यावहारिक जरिया बन गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. लाडो प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री राजश्री योजना में क्या फर्क है?

राजश्री योजना का ही नाम बदलकर लाडो प्रोत्साहन योजना किया गया है और मदद की राशि ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 कर दी गई है। जिन बेटियों की राजश्री योजना के तहत किस्तें बाकी थीं, उन्हें आगे की किस्तें नई दरों पर ही मिलेंगी।

2. क्या यह योजना 1 अगस्त 2024 से पहले जन्मी बेटियों पर भी लागू होती है?

पूरी नई राशि और संरचना 1 अगस्त 2024 और उसके बाद जन्मी बेटियों के लिए है। इससे पहले जन्मी बेटियां पुरानी राजश्री योजना के नियमों के तहत आती हैं, जिसकी बाकी किस्तें अब नई दरों पर मिलेंगी।

3. घर पर जन्म लेने वाली बेटियों को लाभ मिलेगा?

नहीं। इस योजना का लाभ केवल सरकारी अस्पताल या सरकार से अधिकृत चिकित्सा संस्थान में हुए संस्थागत प्रसव पर ही मिलता है।

4. आवेदन ऑनलाइन करना होगा या ऑफलाइन?

अलग से कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं। जन्म और टीकाकरण की जानकारी अस्पताल द्वारा पोर्टल पर दर्ज होते ही पहली दो किस्तें अपने आप जारी हो जाती हैं। आगे की किस्तों के लिए स्कूल में दाखिले के समय शाला दर्पण पोर्टल पर विवरण मिलाया जाता है।

5. निजी स्कूल में पढ़ने वाली बेटियां भी पात्र हैं?

हां, अब राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को भी योजना में शामिल कर लिया गया है, पहले सिर्फ सरकारी स्कूलों की छात्राओं को यह लाभ मिलता था।

6. आखिरी किस्त बेटी को खुद क्यों दी जाती है?

यह जानबूझकर किया गया प्रावधान है, ताकि 21 साल की उम्र या स्नातक पूरा होने पर बेटी खुद अपने आर्थिक फैसले ले सके और उसे आत्मनिर्भरता का एक मजबूत आधार मिले।

नोट: योजना से जुड़े नियम और राशि समय-समय पर सरकार द्वारा संशोधित की जा सकती है। नवीनतम और आधिकारिक जानकारी के लिए राजस्थान सरकार के संबंधित विभाग की वेबसाइट या नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क करें।

Join Our Community